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पृष्ठभूमि|| अंतर्राष्ट्रीय सम्पर्क || विदेशी सहयोगी अकादमियाँ || आदान-प्रदान यात्राओं हेतु वार्षिक कोटा || संयुक्त सेमीनार /संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएँ || इन्सा-जे आर डी टाटा अध्येतावृत्ति || द्विपश्रीय आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय वैज्ञानिकों के नामांकन की प्रक्रिया || विदेशी वैज्ञानिकों के दौरे || अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार || अंतर्राष्ट्रीय अभ्यागत अध्येतावृत्ति || नवीमतम सूची || संपर्क


अंतर-राष्ट्रीय आदान-प्रदान और सहयोग

पृष्ठभूमि
 

वर्ष 1968 से लेकर, अकादमी अनुसंधान संबंधी अनुभव और वैज्ञानिक सूचना का आदान-प्रदान करके विदेशों में वैज्ञानिक अकादमियों/संगठनों के साथ सफलतापूर्वक सहयोग करती आई है। इस प्रकार का संबंध सामान्यतः द्विपक्षीय सहयोग से स्थापित किया जाता है अर्थात् वैज्ञानिक सूचना और प्रकाशनों का आदान-प्रदान, वैज्ञानिकों के दौरों का आदान-प्रदान, सहयोगी अनुसंधान परियोजनाएं, संयुक्त विचार-गोष्ठियों और अन्य वैज्ञानिक क्रियाकलापों का आयोजन। अकादमी भारत में व्यक्तिगत/वैज्ञानिक संस्थाओं के विभिन्न विदेशी सहयोगी देशों के व्यक्तियों/वैज्ञानिक संस्थाओं के साथ संपर्क करके आदान-प्रदान कार्यक्रम समन्वित करती है। इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अकादमी ने यूरोप, एशिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और लातिन अमेरिका में 46 विज्ञान अकादमियों/संगठनों के साथ द्विपक्षीय करार/समझौता ज्ञापन स्थापित किए हैं। आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत, वैज्ञानिकों के दौरों का आदान-प्रदान दो श्रेणियों के अंतर्गत किया जाता हैं :- 2-8 सप्ताह के अल्पकालिक दौरे और 6 मास तक के दीर्घकालिक/अध्येतावृत्ति दौरे। आमतौर पर अल्पकालिक दौरों के लिए विभिन्न संस्थानों में वैज्ञानिकों के साथ चर्चा करने और परस्पर बातचीत करने के लिए वरिष्ठ वैज्ञानिकों को नामित किया जाता है और विदेश में अधिमानतः किसी एक संस्थान/प्रयोगशाला में सहयोगी अनुसंधान प्रशिक्षण के लिए अपेक्षाकृत लम्बी अवधि के लिए युवा वैज्ञानिकों को नामित किया जाता है । (अधिक जानकारी के लिए द्विपक्षीय आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय वैज्ञानिकों का नामांकन देखें).

 

जापान सोसाइटी फॉर द प्रोमोशन ऑफ साइंस (जे एस पी एस) के साथ द्विपक्षीय आदान-प्रदान कार्यक्रम जिसके अंतर्गत 2006 से संयुक्त रूप से भारतीयों और जापानियों दोनों द्वारा तैयार किए गए संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के अंतर्गत भारत और जापान के विज्ञानियों को मदद एवम् समर्थन दी जाती रही है, को केवल वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान के लिए 2009 से आगे के लिए फिर से चालू कर दिया।

वर्ष 1989 में, अकादमी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए और विज्ञान की सार्वजनिक समझ के लिए योगदान हेतु वार्षिक रुप से प्रदान किया जाने वाला जवाहर -लाल नेहरु जन्म शताब्दी पदक आरंभ किया है। सभी राष्ट्रों के वैज्ञानिक इसके लिए विचार हेतु पात्र हैं। प्रथम पुरस्कार वर्ष 1990 में दिया गया था। इस पुरस्कार में एक कांस्य पदक और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। इस पुरस्कार व्याख्यान को देने के लिए यात्रा हेतु वाहन और स्थानीय खर्चे अकादमी द्वारा वहन किए जाएंगे।(अधिक जानकारी के लिए अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार देखें)

भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी और दि रॉयल सोसाइटी, लंदन, प्रत्येक दो वर्षों में बारी-बारी से भारत तथा युनाइटेड किंग्डम में संयुक्त रुप से ब्लैकेट स्मृति व्याख्यान और सर जे.सी.बोस स्मृति व्याख्यान देते हैं, जबकि भारतीय विज्ञानी यू.के.में सर जे.सी.बोस व्याख्यान देते हैं (अधिक जानकारी के लिए इंटरनेशनल पदक देखें)

वर्ष 2005 के प्रारम्भ में, अकादमी ने फ्रैंच अकेडमी ऑफ साइंसिज के सहयोग से भारत और फ्रांस में बारी-बारी से आयोजित की जाने वाली " एटीनी बुल्फ तथा रामानुजन व्याख्यान श्रृंखला " आरंभ की। एटीनी बुल्फ व्याख्यान फ्रांसीसी वैज्ञानिक द्वारा भारत में दिया जाता है और रामानुजन व्याख्यान भारतीय वैज्ञानिक द्वारा फ्रांस में दिया जाता है।

वर्ष 1989 में, अकादमी ने पंडित जवाहर लाल नेहरु की विज्ञान के प्रति वचनबद्धता और निरन्तर समर्थन की याद में जवाहर लाल नेहरु जन्म शताब्दी अभ्यागत अध्येतावृत्ति प्रारंभ की। इस अध्येतावृत्ति से अकादमी विदेश में भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकीय उपलब्धियाँ प्रदर्शित कर पाती है। विदेश में सिलसिलेवार व्याख्यान देने के लिए किसी प्रतिष्ठित भारतीय वैज्ञानिक को वार्षिक रुप से अध्येतावृति प्रदान की जाती है और यह उन्हीं देशों तक सीमित नहीं, जिनके साथ अकादमी का आदान-प्रदान कार्यक्रम चल रहा है

अकादमी ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के सात मिलकर भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों में अनुसंधान कार्य को प्रेरित करने के उद्देश्य से अन्य विकासशील देशों से विज्ञानियों तथा प्रौद्योगिकीविदों को प्रोत्साहित करने के लिए इंसा-जे आर डी टाटा अध्येतावृत्ति प्रारंभ की है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिवर्ष 20 अध्येतावृत्ति देने का प्रावधान है। अध्येतावृति में आने और जाने का विमान किराया, संबद्ध संस्थान/संस्थानों में खाने और रहने की व्यवस्था और आकस्मिक तथा अन्य विविध खर्चों को पूरा करने के लिए भरण-पोषण भत्ता शामिल है। वर्तमान में इस कार्यक्रम का समन्वय सी.सी.एस.टी.डी.एस. (सैंटर फॉर कॉपरेशन इन साइंस एडं टेक्नॉलोजी इन डेवेलोपिंग सोसाइटी कर रही है।

जिन प्रख्यात अनुसंधान कर्ताओं ने एशिया क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, उनको मान्यता देने के लिए अकादमी ने के.के. बिरला फाउंडेशन के साथ मिलकर एशिया में वैज्ञानिक समझ, आपसी बातचीत और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इन्सा- के.के.बिरला फांउडेशन एशिया साइंस लेक्चर सीरीज प्रारंभ की है। (अधिक जानकारी के लिए इंटरनेशनल एवार्डस देखें)

अकादमी इंटर-एकेडमी पैनल ऑन इंटरनेशनल इश्यूज (आई.ए.पी), इंटर-एकेडमी काउंसिल (आई.ए.सी), इंटरनेशनल फांउडेशन फॉर साइंस (आई.एफ.सी), थर्ड वर्ल्ड नेटवर्क ऑफ साइंटिफिक ऑग्रेनाइजेशन (टी.ड्ब्ल्यू.एन.एम.ओ.), एकेडमी ऑफ साइंसिज फॉर द डवेलोपिंग कंट्रीज (टी.डब्ल्यू.ए.एस) का सदस्य रही है और फैडरेशन ऑफ एशियन साइंटिफिक एकेडमीज (एफ.ए.एस.ए.एस.), जापान साइंस काउंसिल (एस.सी.जे.) द्वारा स्थापित की गई साइंसिज काउंसिल ऑफ एशिया (एस.सी.ए) , कोरियन एकेडमी ऑफ साइंस एंड टेक्नॉलोजी (के.ए.एस.टी) द्वारा स्थापित एसोसिएशन ऑफ दि एकेडमीज ऑफ साइंसिज इन एशिया (ए.ए.एस.ए.) और एकेडमी ऑफ साइंस इंजीनियरिंग एण्ड इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलोजी(ए.एस.ई.ए.एन) और एकेडमी ऑफ साइंसिज मलेशिया द्वारा स्थापित इसी प्रकार की राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग करके एशियाई क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के संवर्धन में एक सक्रिय भूमिका निभा रही है। (अधिक जानकारी दिए गए पते पर संबंधित संस्थाओं/अकादमियों की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।)


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