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इतिहास

द नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ साइंसेज ऑफ इंडिया , अब भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की स्थापना दिनांक 7 जनवरी, 1935 में कलकत्ता में हुई थी और यह वर्ष 1951 तक एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के अपने मुख्यालय में कार्य करती रही और इसके बाद दिल्ली मे स्थानांतरित हो गई।

भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की स्थापना वर्ष 1935में भारत में विज्ञान की प्रगति तथा मानवता एवं राष्ट्र कल्याण के लिए वैज्ञानिक ज्ञान का प्रसार करने के उद्देश्य से की गई थी। अकादमी जिसे पहले नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ साइंसेज इन इंडिया (निसी) के नाम से जाना जाता था, की स्थापना कुछ संस्थाओं और व्यक्तियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम थी तथा इस संबंध में इंडियन साइंस काँग्रेस एसोसिएशन(आई.एस.सी.ए) ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।

वर्ष 1930 के अंतिम दौर में, तत्कालीन भारत सरकार ने विभिन्न राज्यों (तब प्रांतीय) सरकारों, वैज्ञानिक विभागों, विद्वत समाजों, विश्वविद्यालयों तथा आई.एस.सी.ए. को पत्र लिखा और एक राष्ट्रीय अनुसंधान परिषद के निर्माण की वांछनीयता पर उनकी राय मांगी जो अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान परिषद और इससे संबद्ध संघों के साथ मिलकर सहयोगात्मक रुप में काम करे। इसी समय नेचर के संपादक सर रिचर्ड ग्रेगोर इंडियन अकेडमी ऑफ साइंस को प्रोत्साहन देने के लिए करंट साइंस के संपादक के साथ बातचीत करने भारत आए। इस प्रस्ताव पर बहुतेरे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने विचार विमर्श किया और एक स्तरीय राष्ट्रीय परिषद के संगठन तथा कार्यप्रणाली के संबंध में उनके दृष्टिकोणों को आई.एस.सी.ए.के पुणे सत्र के दौरान,एक प्रस्ताव के रुप में सबके सामने रखा । इस योजना पर विचार करने के लिए जनवरी, 1934 में मुम्बई में आई.एस.सी.ए. की एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। आई.एस.सी.ए. के अध्यक्ष प्रोफेसर एम.एन. साहा द्वारा रॉयल सोसाइटी, लंदन के अनुरुप, भारतीय विज्ञान अकादमी बनाने के लिए किए गए निवेदन के फलस्वरुप आई.एस.पी. ए. की आम समिति ने राष्ट्रीय वैज्ञानिक के निर्माण के प्रस्ताव को एकमत से सहमति प्रदान की। समिति ने एक ‘अकादमी समिति’ का गठन किया, जिससे आई.एस.सी.ए. के अगले सत्र में विचार के लिए एक विस्तृत ब्यौरा तैयार करने हेतु अनुरोध किया गया। समिति ने 1935 में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें इन्सा नई दिल्ली (1) निर्माणाधीन राष्ट्रीय वैज्ञानिक सोसाइटी के लक्ष्यों और उद्देश्यों; (2) इसके संविधान के प्रारुप ; (3) एक विशेषज्ञ समिति द्वारा चुने गए 125 संस्था सदस्यों ; तथा (4) अकादमी की अंतरिम परिषद के सदस्यों के रुप में 25 वैज्ञानिकों के नाम शामिल किए गए थे। डॉ. एल.एल. फ्रेमोर (आई.एस.सी.ए. के 22 वें सत्र के अध्यक्ष) ने 3 जनवरी, 1935 को संयुक्त समिति की एक विशेष बैठक में अकादमी समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की। अकादमी समिति की सिफारिशों को आई.एस.सी.ए. ने सर्वसम्मत प्रस्ताव द्वारा स्वीकार कर लिया और इस प्रकार वैज्ञानिकों के एक अखिल भारतीय संगठन के रुप में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सांइसेज ऑफ इंडिया (निसि) की नींव पड़ी। कलकत्ता में 07 जनवरी, 1935 को, डॉ. जे.एच. हटन (आई.एस.सी.ए. के 23वें सत्र के अध्यक्ष की अध्यक्षता में नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ साइंसेज ऑफ इंडिया (निसि) की उद् घाटन बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें निसि के प्रथम अध्यक्ष डॉ. एल.एल. फ्रेमोर ने उद् घाटन भाषण दिया। इस प्रकार इस संस्थान में उसी दिन से 1, पार्क स्ट्रीट कलकत्ता स्थित एशियाटिक सोसाइटी के प्रधान कार्यालय से अपना कार्य करना आरम्भ कर दिया।

नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ साइंसेज ऑफ इंडिया (निसि) को सरकार द्वारा वैज्ञानिकों की एक प्रतिनिधि संस्था के रुप में मान्यता देने के विषय को, इसकी स्थापना के दस वर्षों के पश्चात उठाया गया। पर्याप्त विचार विमर्श और चर्चाओं के पश्चात, अक्तूबर, 1945 में नेशनल इंस्टीटयूट को एक प्रमुख वैज्ञानिक संस्था के रुप में मान्यता देने का निर्णय लिया गया जिसमें भारत में विज्ञान की सभी शाखाओं तो प्रतिनिधित्व मिल सके। मई 1946 में इसका मुख्यालय दिल्ली में स्थानांतरित हो गया और सरकार ने इसे अधिक सहायता अनुदान देना प्रारम्भ कर दिया ताकि यात्रा, प्रकाशनों, अनुसंधान अध्येतावृत्तियों पर होने वाले खर्च को पूरा करने तथा अन्य वैज्ञानिक संस्थाओं को उनके पत्र प्रकाशित करने के लिए अनुदान प्रदान करने में होने वाले खर्च को पूरा किया जा सके। सरकार ने 1948 में मुख्यालय का भवन बनाने के लिए एक पूंजीगत अनुदान को भी मंजूरी दे दी। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरु ने 19 अप्रैल, 1948 को इस भवन की नींव रखी। वर्ष 1951 में निसि का कार्यालय बहादुर शाह ज़फर मार्ग, नई दिल्ली स्थित इस वर्तमान परिसर में आ गया। जनवरी 1968 में भारत सरकार की ओर से इसे इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ साइंस (इक्सू) की सहयोगी संस्था के रुप में र्निदिष्ट किया गया।

फरवरी, 1970 में नेशनल इंस्टीटयूट, ऑफ साइंसेज ऑफ इंडिया का नाम बदल कर इंडियन नेशनल सांइस अकेडमी (इन्सा-भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी) कर दिया गया।

 
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